हमें आपके समक्ष द लेक्सिकनः नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा व अभिरुचि पुस्तक का अष्टम संशोधित संस्करण प्रस्तुत करते हुए अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है। यह पुस्तक संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (CSE), विशेष रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-IV (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा व अभिरुचि) की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों की सहायता हेतु सावधानीपूर्वक तैयार किया गया एक संग्रह है। यह विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाओं तथा अन्य परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी है, जिनके पाठ्यक्रम में नीतिशास्त्र शामिल है।
सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र IV में प्रश्नों की बदलती प्रकृति:
प्रश्न-पत्र में उभरते रुझान यह संकेत देते हैं कि अब प्रश्नों का स्वरूप अधिक अंतरविषयी होता जा रहा है, जिसमें डिजिटल युग की चुनौतियों, युद्ध और कूटनीति की नई प्रवृत्तियों,अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नैतिकता, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा पर्यावरणीय संकटों जैसे महत्वपूर्ण समकालीन पहलुओं का समावेशन बढ़ रहा है। महावीर, विलियम जोन्स आदि जैसे दार्शनिकों से संबंधित प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्न नैतिक शासन के प्रमुऽ पहलुओं के संबंध में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर नवीनीकृत तरीके से ध्यान केंद्रित करते हैं।
केस स्टडीज में, नैतिक दुविधाओं की स्थितियों को हल करने पर जोर दिया गया है, जिसके लिए विभागीय कार्यप्रणाली, कल्याणकारी योजनाओं, संघर्षों के दौरान मानवीय स्थितियों को संभालने आदि के बारे में जानकारी की आवश्यकता होती है।
इस संस्करण में नया क्या है?
यह नया संस्करण पुनर्गठित एवं परिष्कृत सामग्री के माध्यम से इन उभरते रुझानों के अनुकूल पुनर्संरेखित किया गया है, जिसमें शैक्षणिक संरचना में महत्वपूर्ण संशोधन तथा सामग्री का सुविचारित पुनर्संयोजन सम्मिलित है। बेहतर वैचारिक स्पष्टता के लिए प्रमुख नीतिशास्त्रीय शब्दों, अवधारणाओं तथा सिद्धांतों को सरलीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है। जो नीतिशास्त्रीय शब्द समान एवं भ्रमित करने वाले हैं, उन्हें सटीक रूप से पृथक रूप में परिभाषित किया गया है ताकि आपको स्पष्ट समझ प्राप्त हो सके। बेहतर समझ एवं विचारों के अनुप्रयोग हेतु विषय वस्तु के तार्किक क्रम को बनाए रऽने के लिए अध्यायों को व्यवस्थित रूप से संशोधित किया गया है।
एक शुरुआत के रूप में तैयारी का पहला चरण
चरण 1- प्रमुख शब्दावलियों की समझ:
- नीतिशास्त्र के संबंध में प्रारंभिक स्पष्टता विकसित करने तथा इस पुस्तक की ज्ञान-मीमांसा से परिचित होने के लिए, सर्वप्रथम आपको इसके आरंभ में दिए गए “पाठ्यक्रम” और “पाठ्यक्रम में प्रयुक्त शब्दों के अभिप्राय” का अध्ययन करना चाहिए।
- पाठ्यक्रम की समझ आपको इस प्रश्न-पत्र की मांग एवं दायरे से परिचित कराएगी तथा “पाठ्यक्रम में प्रयुक्त शब्दों के अभिप्राय” का अध्ययन आपको इसकी स्पष्ट समझ विकसित करने में सहायक होगा।
चरण 2- मूलभूत अवधारणाओं का विश्लेषण और वास्तविक जीवन में उनके अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रण:
- पाठ्यक्रम से परिचित होने के बाद, आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप इस पुस्तक का ‘प्रथम बार अध्ययन’ (First Reading) करें।
- प्रथम बार अध्ययन के दौरान पाठक को बुनियादी अवधारणाओं और वास्तविक जीवन परिवेश में उनके अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- यह विषय छात्रों से बुनियादी समझ की मांग करता है; इसलिए संबंधित अवधारणाओं एवं विषयों के बीच अंतर करने का प्रयास करें।
- विषयों से अधिक परिचित होने तथा गहरी अवधारणात्मक समझ एवं स्पष्टता प्राप्त करने के लिए, इस पुस्तक को दोबारा पढ़ने की आवश्यकता होगी।
- अध्ययन के दौरान पाठक को नीतिशास्त्र से जुड़ी अवधारणाओं को आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए तथा पाठ्यक्रम में दिए गए 'प्रमुख शब्दों' (Keywords) को कंठस्थ कर लेना चाहिए, इससे उन्हें विषय के साथ अधिक सहज होने में मदद मिलेगी।
चरण 3- केस स्टडी पढ़ते समय वास्तविक जीवन स्थितियों को चित्रित करना:
- तीसरे चरण में विशेष रूप से 'व्यावहारिक पहलुओं' पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए इस प्रश्न-पत्र का एक व्यापक और विश्लेषणात्मक ढांचा विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
- आप इस पुस्तक में दी गई केस स्टडी को पढ़कर और विभिन्न अवधारणाओं के अंतर्संबंधों को समझकर इस संदर्भ में अधिकतम प्रभावोत्पादकता विकसित कर सकते हैं।
- केस स्टडी को हल करने के लिए आयामों की विविधता और सिद्धांतों के अनुप्रयोग की समझ जरूरी है।
- ऐसे में इस पुस्तक का "केस स्टडी" नामक खंड आवश्यक अभिवृत्ति और अभिरुचि या अभिक्षमता विकसित करने, विषयों की व्यापक समझ बनाने में मददगार हो सकता है।
चरण 4- अवधारणाओं/केस स्टडीज का विगत वर्ष के प्रश्नों के परिप्रेक्ष्य में अवलोकन:
- एक बार जब आप ये सभी चरण पूरा कर लें, तो विगत वर्षों के प्रश्नों को पढ़ते समय अपनी समझ का विश्लेषण करने का प्रयास करें।
- यह आपको इस विषय के संबंध में गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा और इस पुस्तक के द्वारा आपकी अर्जित अभिक्षमता को प्रतिबिंबित करेगा। बाद में इस पुस्तक की बार-बार और आवधिक पुनरावृत्ति के माध्यम से आप इसे और बढ़ा सकते हैं।
- भविष्य के लिए शुभकामनाएं साथ ही पुस्तक में सुधार और संशोधन के संबंध में आप अपने सुझाव editor@chronicleindia.in पर भेज सकते हैं।
अनुक्रमणिका: द लेक्सिकन नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा व अभिरुचि 2026
- लेक्सिकन ऑफ केस स्टडी
- केस स्टडी: पूर्वावलोकन एवं संक्षिप्त विश्लेषण
- नीतिशास्त्र, मूल्य एवं नैतिकता
- नीतिशास्त्र और मानवीय सह-संबंध
- अभिवृत्ति
- सिविल सेवा अभिरुचि और बुनियादी मूल्य
- भावनात्मक समझ
- भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दर्शनिकों के योगदान
- लोक प्रशासन में लोक /सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्र
- अन्तर्राष्ट्रीय संबंध और नैतिकता
- शासन व्यवस्था में ईमानदारी
- प्रशासन में हितों का संघर्ष /टकराव
- व्यावसायिक नीतिशास्त्र
- उद्धरण और कथन
- नैतिक मुद्दे
- नीतिशास्त्र संबंधिक शाव्दावली
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